

एक बड़े झूले की कीमत करीब 20 लाख, 19 झूलों की अनुमानित कीमत 3.80 करोड़ रुपये; आखिर कितनी संपत्ति और कारोबार वाला व्यक्ति उठा सकता है इतनी बड़ी जिम्मेदारी?
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले कार्तिक मेले में इस बार झूलों का कारोबार भी करोड़ों के आंकड़े तक पहुंच गया है। मेले में 19 झूले लगाने के लिए नगर निगम ने करीब 1 करोड़ 33 लाख रुपये का संयुक्त टेंडर जारी किया है। खास बात यह है कि इतने बड़े ठेके को एक ही व्यक्ति को दिए जाने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर इतना बड़ा ठेका लेने वाले व्यक्ति की आर्थिक हैसियत कितनी होनी चाहिए?
जानकारी के अनुसार इस टेंडर में करीब 14 लाख रुपये की EMD यानी अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट जमा करने की शर्त सामने आई है। यदि 1 करोड़ 33 लाख रुपये के ठेके के मुकाबले 14 लाख रुपये की EMD का गणित देखें तो यह ठेका राशि का लगभग 10.53 प्रतिशत बैठता है। इतनी बड़ी राशि की जमानत जमा करने के लिए भी मजबूत वित्तीय व्यवस्था जरूरी होती है।
19 झूलों की कीमत ही करीब 3 करोड़ 80 लाख!

यदि झूलों की वास्तविक बाजार कीमत का आकलन करें तो एक बड़े झूले की कीमत कम से कम 20 लाख रुपये के आसपास मानी जाए तो 19 झूलों की अनुमानित कीमत 3 करोड़ 80 लाख रुपये तक पहुंचती है। हालांकि सभी झूलों की कीमत एक समान नहीं होती। छोटे-बड़े झूलों, उनकी तकनीक, क्षमता और निर्माण के आधार पर कीमत में अंतर हो सकता है।
ऐसे में सवाल यह है कि जिस व्यक्ति को 19 झूलों के संचालन का जिम्मा दिया जाएगा, उसके पास क्या इतने बड़े निवेश के अनुरूप संपत्ति और वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं? क्या सभी झूले ठेकेदार के स्वयं के हैं या कुछ झूले अन्य संचालकों से किराये पर लेकर लगाए जाएंगे?
एक करोड़ का ठेका लेने वाले का कारोबार कितना होना चाहिए?
किसी भी बड़े सरकारी ठेके को लेने के लिए केवल बैंक खाते में पैसा होना ही पर्याप्त नहीं होता। ठेकेदार की वित्तीय क्षमता, पिछले वर्षों का कारोबार, आयकर रिटर्न, बैंक स्टेटमेंट, ऑडिट रिपोर्ट, नेटवर्थ और पूर्व में किए गए कार्यों का रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होता है।
आयकर के लिहाज से भी यह समझना जरूरी है कि एक करोड़ रुपये का टर्नओवर होने का अर्थ एक करोड़ रुपये का मुनाफा या संपत्ति होना नहीं है। आयकर सामान्यतः व्यवसाय के कर योग्य मुनाफे के आधार पर निर्धारित होता है।
नगर निगम की पात्रता शर्तें भी सवालों के घेरे में
इतने बड़े संयुक्त टेंडर में यह जानना जरूरी है कि क्या ठेकेदार के लिए न्यूनतम वार्षिक टर्नओवर निर्धारित किया गया है? क्या नेटवर्थ की कोई सीमा रखी गई है? क्या पिछले वर्षों में इसी तरह के मेले या मनोरंजन संबंधी व्यवस्थाओं का अनुभव अनिवार्य है? क्या ठेकेदार को सभी 19 झूलों का स्वामित्व प्रमाणित करना होगा?
साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि क्या टेंडर में एक व्यक्ति को सभी झूलों का ठेका देने के पीछे कोई विशेष पात्रता रखी गई है या छोटे झूला संचालकों के लिए भी इसमें भागीदारी का अवसर है?
सवाल सिर्फ ठेके का नहीं, सुरक्षा और जवाबदेही का भी है।

कार्तिक मेला हजारों परिवारों और बच्चों के मनोरंजन का प्रमुख केंद्र होता है। ऐसे में झूलों की गुणवत्ता, तकनीकी फिटनेस, बीमा, सुरक्षा प्रमाणपत्र और दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी तय होना सबसे महत्वपूर्ण है।
नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि 1 करोड़ 33 लाख रुपये के इस बड़े ठेके के लिए कौन-कौन सी वित्तीय और तकनीकी पात्रता निर्धारित की गई है तथा सफल ठेकेदार की आर्थिक क्षमता की जांच किस आधार पर की जाएगी।
क्योंकि जब 19 झूलों और करोड़ों के कारोबार की जिम्मेदारी एक व्यक्ति के हाथ में होगी तो जनता यह जानना जरूर चाहेगी कि आखिर कार्तिक मेले में झूले लगाने और चलाने वाले की आर्थिक हैसियत कितनी है?19 झूलों का ठेका 1.33 करोड़ में, 14 लाख की EMD जमा करने वाले ठेकेदार की आर्थिक हैसियत कितनी है?

